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Chandra Institute UPTET Notes PDF|UP TET last year paper solution , बदल गया यूपीटेट का पैटर्न इस तरह से प्रश्न पूछे जाएंगे

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Chandra Institute UPTET Notes PDF
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Table of Contents

Chandra Institute UPTET Notes PDF- यूपीटेट 2020 में पूछे गए साइकोलॉजी के यहां पर 30 क्वेश्चन दिए जा रहे हैं यह क्वेश्चन नए पैटर्न से रिलेटेड है ऐसा ही पैटर्न पर आपके क्वेश्चन पूछे जाएंगे इन क्वेश्चन ओं को जल्दी से आप लगा दीजिए इनको हम पीडीएफ में भी डाउनलोड कर सकते हैं, READ ALSO UP TET Notes Download|Chandra Institute UPTET Notes PDF

“भाग-1) बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र,Chandra Institute UPTET Notes PDF-

1. किसने बहुविमात्मक प्रज्ञा का प्रत्यय दिया ?

(1) गोलमैन .

(2) स्पीयरमैन

(3) जॉन मेयर

(4) गार्डनर

व्याख्या (4) बहुविमात्मक प्रज्ञा (Multiple Intelligence ) का प्रत्यय गार्डनर (Gardner) ने दिया । गार्डनर के अनुसार बुद्धि एक तत्व न होकर अलग-अलग बुद्धियों का समुच्चय है। हाँलाकि ये बुद्धि एक-दूसरे से पृथक एवं स्वतन्त्र होती हैं। > गार्डनर ने नौ प्रकार की बुद्धियों का वर्णन किया है जो इस प्रकार हैं-1. भाषाई बुद्धि (Linguistic Intelligence)2. तार्किक गणितीय बुद्धि (Logical Mathematical Intelligence)3. देशिक बुद्धि (Spatial Intelligence) 4. संगीतात्मक बुद्धि (Musical Intelligence) 5. शारीरिक -गतिसंवेदी बुद्धि (Bodily – Kinesthetic Intelligence) 6. अन्तवैयक्तिक बुद्धि (Interpersonal Intelligence) 7. अन्त: व्यक्तिक बुद्धि ( Intrapersonal Intelligence)8. प्रकृतिवादी बुद्धि (Naturalistic) 9. अस्तित्वादी (Existential) किसी समस्या के समाधान हेतु ये सभी बुद्धियाँ आपस में अन्तःक्रिया करते हुए कार्य करती हैं तथा समाधान तक पहुँचती हैं।प्रश्न के अन्य विकल्पों से, गोलमैन ने सांवेगिक बुद्धि (Emotional Intelligence) को लोकप्रिय बनाया। स्पीयरमैन ने बुद्धि के द्विकारक सिद्धान्त (Two-factor theory of Intelligence) का प्रतिपादन किया। है। जॉन मेयर ने संवेगात्मक बुद्धि की अवधारणा को स्पष्ट करने हेतु गंभीर प्रयोग किए हैं।

2. डिस्लेक्सिया में यह करने में कठिनाई होती है 

(1) पढ़ने / वर्तनी में

(2) व्यक्त करने में

 (3) खड़े होने में

(4) बोलने में

व्याख्या (1) डिस्लेक्सिया (Dyslexia) में पढ़ने / वर्तनी में कठिनाई होती है। > अधिगम अक्षमता डिस्लेक्सिया में मस्तिष्क के दोनों गोलार्द्ध सही ढंग से कार्य नहीं करते हैं।

3. निम्न में से क्या समावेशी कक्षा में शिक्षक की भूमिका नहीं है?

(1) बच्चे की आवश्यकता के अनुरूप बैठने की पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए

(2) शिक्षक को नि:शक्त बच्चों पर ध्यान नहीं देना चाहिए

 (3) शिक्षक को बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए

(4) शिक्षक को सीखने में अक्षम को अतिरिक्त समय देना चाहिए

व्याख्या (2) शिक्षक को नि:शक्त बच्चों पर ध्यान नहीं देना चाहिए यह एक समावेशी कक्षा के शिक्षक की भूमिका नहीं है। समावेशी कक्षा एक ऐसी अवधारणा है जिसमें एक नियमित विद्यालय में सामान्य एवं विशेष आवश्यकता वाले बालक (प्रतिभाशाली एवं सृजनात्मक बालक, शारीरिक एवं मानसिक रूप से निःशक्त बालक) एक साथ शिक्षा ग्रहण करते हैं। कक्षा में इस विविधता के कारण एक शिक्षक को

निःशक्त बालकों की अवहेलना कदापि नहीं करनी चाहिए तथा सभी बालकों को सीखने के समान अवसर उपलब्ध कराने चाहिए।

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4. कक्षा में छात्रों को प्रश्न पूछने के लिए

(1) हतोत्साहित करना चाहिए 

 (2) प्रेरित करना चाहिए

 (3) रोक देना चाहिए

(4) अनुमति नहीं देनी चाहिए

व्याख्या (2) कक्षा में विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने के लिए प्रेरित करना चाहिए। विद्यार्थियों द्वारा प्रश्न करने से कक्षा में सजीवता बनी रहती है जिससे

5. बच्चे की वृद्धि मुख्यतः सम्बन्धित है

(1) शारीरिक विकास से

 (2) सामाजिक विकास से

(3) भावात्मक विकास से 

(4) नैतिक विकास से

व्याख्या (1) बच्चे की वृद्धि मुख्यतः शारीरिक विकास से सम्बन्धित है। > शारीरिक आकार और बनावट में परिवर्तन होना वृद्धि कहलाता है। वृद्धि का सम्बन्ध बाह्य रूप से होता है जैसे- शारीरिक लम्बाई, भार, हाथों-पैरों के आकार में वृद्धि, आंतरिक अंगों में वृद्धि एवं विकास आदि । > परिपक्वता आने पर वृद्धि रूक जाती है। यह सम्पूर्ण विकास प्रक्रिया का केवल एक चरण है।

6. मानव विकास का प्रारम्भ होता है

(1) गर्भावस्था से

(2) पूर्व-बाल्यावस्था से

(3) उत्तर बाल्यावस्था से

(4) शैशवावस्था से

व्याख्या (1) मानव विकास का प्रारम्भ गर्भावस्था (Pre-Natal stage) से है।  गर्भाधान से लेकर जन्म तक की अवधि गर्भावस्था कहलाती है।मानव विकास की इस प्रथम अवस्था में भ्रूण का विकास होना प्रारम्भ हो जाता है। > मानव विकास की विभिन्न अवस्थाएँ इस प्रकार हैं-1. गर्भावस्था (Pre-Natal Stage); (गर्भाधान से जन्म तक) 2. शैशवावस्था (Infancy): ( 0-2 वर्ष) 3. बाल्यावस्था (Childhood); (2 से 12 वर्ष) () प्रारम्भिक बाल्यावस्था (Early Childhood): (2 से 6 वर्ष) (i) उत्तर बाल्यावस्था (Later Childhood) (6 से 12 वर्ष) 4. किशोरावस्था (Adolescence); (12 से 16 वर्ष) 5. वयस्कावस्था (Adulthood); (16 से 60 वर्ष) 6. वृद्धावस्था (Old Age): (60 वर्ष से अधिक) (1) ई. एल. थार्नडाइक 3) आर. एम. ने 7. ‘द कंडीशन्स ऑफ लर्निंग’ पुस्तक के लेखक हैं (2) बी. एफ. स्किनर (4) आई.पी. पावलव  सॉल्वड पेपर (08-01-2020) | 19

(

8. “किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तनाव, हमला व विरोध की अवस्था’ है।” यह कथन किसका है?

(1) जरशील्ड

(2) स्टेन्ले हॉल

(3) सिम्पसन

(4) क्रो एण्ड क्रो

व्याख्या (2) स्टेन्ले हॉल के अनुसार, “किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तनाव, हमला व विरोध की अवस्था है।” > हॉल ने किशोरावस्था में अधिक तनाव का मूल कारण किशोरों की अन्तः प्रेरणाओं जैसे परिवर्तनवाद / रूढ़िवाद तथा सवेदनशील / कठोरता आदि में मानसिक संघर्ष को बताया है।

9. सूक्ष्म शिक्षण के भारतीय प्रतिमान में कुल कितना समय लगता है?

(1) 36 मिनट 

(2) 40 मिनट

 (3) 45 मिनट

(4) 30 मिनट

व्याख्या (1) NCERT के अनुसार, सूक्ष्म शिक्षण (Micro Teaching). भारतीय प्रतिमान में कुल 36 मिनट का समय लगता है जो इस प्रकार है-वर्ष 1970 में प्रारम्भ हुए। .

10. “सीखने का पठार सीखने की प्रक्रिया के मुख्य अभिलक्षण हैं जो उस स्थिति को प्रकट करते हैं जिसमें सीखने की प्रक्रिया में कोई उन्नति नहीं होती।” यह कथन किसका है?

 (1) गेट्स व अन्य

(2) हालिंगवर्थ

(3) रॉस

(4) स्किनर

व्याख्या (3) रॉस के अनुसार, “सीखने का पठार सीखने की प्रक्रिया का मुख्य अभिलक्षण हैं जो उस स्थिति को प्रकट करता है जिसमें सीखने की प्रक्रिया में कोई उन्नति नहीं होती।”

11. यदि शिक्षक कक्षा में एक छात्र को समस्यात्मक बालक के रूप में पाता है, तो उसे

(1) बच्चे को दण्ड देना चाहिए 

(2) बच्चे को नजरअन्दाज कर देना चाहिए

(3) बच्चे को परामर्श देना चाहिए” 

(4) तत्काल घर वापस भेज देना चाहिए

व्याख्या (3) यदि शिक्षक कक्षा में एक छात्र को समस्यात्मक बालक के रूप में पाता है, तो उसे बच्चे को परामर्श देना चाहिए। समस्यात्मक बालक वैसे बालकों को कहा जाता है जिनके व्यवहार में असमानता होती है अर्थात् व्यक्तिगत एवं सामाजिक स्तर पर इनकी समस्याएँ इतनी जटिल होती है कि इनका अन्तरवैयक्तिक (Interpersonal) सम्बन्ध समाप्त हो जाता है। > परामर्श के माध्यम से समस्यात्मक व्यवहार को पुनर्बलन (reinforcement) के आधार पर अच्छे व्यवहार करने को बढ़ावा दिया। जा सकता है।

12. पाठ्य सहगामी क्रियाएँ मुख्यतः सम्बन्धित है

(1) शैक्षिक संस्थानों के विकास से

(2) छात्रों के सर्वांगीण विकास से

(3) छात्रों के वृत्तिक विकास से

(4) छात्रों के मानसिक विकास से

व्याख्या (2) पाठ्य सहगामी क्रियाएँ मुख्यतः छात्रों के सर्वांगीण विकास से सम्बन्धित है। विषयों (Syllabus) के शिक्षण से बालक के केवल ज्ञानात्मक पक्ष का विकास हो पीता है जिस कारण भावात्मक एवं क्रियात्मक पक्षों की अवहेलना हो जाती है। भावात्मक एवं क्रियात्मक पक्ष के उचित विकास हेतु अतिरिक्त क्रियाएँ आयोजित की जाती हैं जिन्हें पाठ्य सहगामी क्रियाएँ (Co-Curricular activities) कहते हैं। ये पाठ्य सहगामी क्रियाएँ छात्रों में अनुशासन, नेतृत्व के गुण, अभिरूचियों, सृजनात्मकता आदि गुणों का विकास करती हैं।

13. निम्न में से किसने अधिगम सिद्धान्त का प्रतिपादन नहीं किया?

(1) कोहलर

(2) स्किनर

(3) बी.एस. ब्लूम

(4) थार्नडाइक

व्याख्या (3) डॉ. बी. एस. ब्लूम (Dr. B. S. Bloom) ने अधिगम सिद्धान्त का प्रतिपादन नहीं किया है बल्कि शिक्षा के व्यवहारात्मक पक्ष (Behavioural Aspects of Education) प्रतिपादित किए हैं जो इस

14. शिक्षा में अवरोधन का तात्पर्य है 

(1) बालक का विद्यालय में प्रवेश न लेना

(2) बालक का विद्यालय न जाना 

(3) बालक द्वारा विद्यालय छोड़ देना

(4) किसी बालक का एक वर्ष से अधिक समय तक एक ही कक्षा में रहना

व्याख्या (4) शिक्षा में अवरोधन (Stagnation) का तात्पर्य है किसी बालक का एक वर्ष से अधिक समय तक एक ही कक्षा में रहना। प्राथमिक शिक्षा में अपव्यय एवं अवरोधन (Wastage and Stagnation) का सर्वप्रथम विस्तृत अध्ययन हटोग समिति (1929) ने किया था। शिक्षा में अपव्यय का अर्थ है कि किसी भी स्तर की शिक्षा को पूर्ण करने से पूर्व ही विद्यालय छोड़ देना।

15. निम्न में से किस कौशल में पूर्व ज्ञान का परीक्षण आता है?

(1) उद्दीपन परिवर्तन कौशल

(2) प्रस्तावना कौशल

(3) समापन कौशल 

 (4) प्रदर्शन कौशल

व्याख्या (2) प्रस्तावना कौशल (Skill of Introduction) में पूर्व ज्ञान का परीक्षण आता है।

पूर्व ज्ञान से तात्पर्य विद्यार्थियों के उन अधिगम अनुभवों से है जो कि पाठ को समझने के लिए आवश्यक हैं। यदि नवीन ज्ञान को उसके पूर्व अधिगम अनुभवों से जोड़ा जाए तो उसके सीखने की प्रक्रिया में निरंतरता बनी रहती है। प्रश्न के अन्य विकल्पों से उद्दीपन-परिवर्तन कौशल (Skil Stimulus-Variation) शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में शिक्षक दि…. प्रकार की अनुक्रियाएँ जैसे प्रश्न पूछना, श्यामपट्ट पर लिखना, चित्र दिखाना, हाथ या पांइटर से किसी स्थान विशेष को इंगित करना, विद्यार्थियों के उत्तरों में आवश्यकतानुसार सुधार करना आदि करता है। ताकि विद्यार्थियों का ध्यान विषय-वस्तु पर केन्द्रित रह सकें। अध्यापक के ये प्रयास उद्दीपन परिवर्तन कौशल से सम्बन्धित हैं।

17. “विकास कभी न समाप्त होने वाली प्रक्रिया है।” यह कथन विकास के किस सिद्धान्त से सम्बन्धित है?

 (1) अन्तःक्रिया का सिद्धान्त

(3) अन्तःसम्बन्ध का सिद्धान्त

(2) एकीकरण का सिद्धान्त 

(4) निरन्तरता का सिद्धान्त

व्याख्या (4) “विकास कभी न समाप्त होने वाली प्रक्रिया है।” यह कथन विकास के निरन्तरता के सिद्धान्त (Principle of Continuity) से सम्बन्धित है। इस सिद्धान्त के अनुसार विकास जीवन पर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है। गति में कभी तीव्रता तो कभी मन्दता देखने को मिलती है।अन्य विकल्पों से, 3. क्रिया का सिद्धान्त (Principle of Interaction)- विकास सानुक्रम एवं वातावरण की अन्तःक्रिया द्वारा होता है।का सिद्धान्त (Principle of Inter-एकरण का सिद्धान्त (Principle of Integration)- विकास सभी अंगों के मध्य समन्वय / एकीकरण के द्वारा होता है। अन्तः सम्बन्ध relationship)-विकास के आयाम जैसे शारीरिक, बौद्धिक, संवेगात्मक, सामाजिक ये सभी एक-दूसरे से अन्तः सम्बन्धित होते हैं एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।

18. संविधान के किस संशोधन से शिक्षा एक मौलिक अधिकार बन गया है?

(1) 86 वें संशोधन 

2) 25 वें संशोधन

 (3) 52 वें संशोधन

(4) 22 वें संशोधन

व्याख्या (1) संविधान के 86वें संशोधन से शिक्षा एक मौलिक अधिकार बन गया है। > 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के द्वारा भाग-III में एक नए अनुच्छेद 21 (A) को समाविष्ट किया गया है।> यह अधिनियम 1 अप्रैल, 2010 से पूरे भारत में लागू हो चुका है। > यह अधिनियम 6-14 आयु वर्ग के सभी बच्चों की निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा को सुनिश्चित करता है।

19. अभिप्रेरणा के मूल प्रवृत्ति सिद्धान्त के प्रतिपादक थे 

(1) मैक्डूगल 

(2) अब्राहम मैस्लो 

 (4) विलियम जेम्स

(3) सिम्पसन

(1) अभिप्रेरणा के मूल प्रवृत्ति सिद्धान्त (Instinct Theory of Motivation) के प्रतिपादक मैक्डूगल (Me-Dougall) थे। मूल-प्रवृत्तियाँ क्रियाओं के लिए प्रेरक का कार्य करती हैं, इसलिए मैकडुगल ने इन्हें जन्मजात मनो- शारीरिक उपद्रव (Psycho Physical Disposition) कहा है। मैक्डूगल ने 14 मूल प्रवृत्तियाँ बताई हैं जो किसी-न-किसी संवेग से जुड़ीरहती हैं। ये मूल प्रवृत्तियों इस प्रकार हैं-मूल प्रवृत्ति

20. विकास की किस अवस्था को कोल तथा ब्रूस ने “संवेगात्मक विकास का अनोखा काल” कहा है?

(1) शैशवावस्था

(2) बाल्यावस्था 

(3) प्रौढ़ावस्था 

(4) किशोरावस्था

व्याख्या (2) बाल्यावस्था “संवेगात्मक विकास का अनोखा काल” कहा है।(Childhood )

21. ‘व्यवहार के कारण व्यवहार में परिवर्तन ही अधिगम है’ यह किसने कहा है?

(1) वुडवर्थ

(2) गिलफर्ड

(3) स्किनर

(4) क्रो एण्ड को

व्याख्या (2) गिलफर्ड के अनुसार, “व्यवहार के कारण व्यवहार में परिवर्तन ही अधिगम है।”

23. समस्या समाधान का प्रथम चरण है

(1) आंकड़ा संग्रहण 

(2) समस्या की पहचान 

(3) परिकल्पना का परीक्षण

(4) परिकल्पना का निर्माण

व्याख्या (2) समस्या समाधान

24. बालकों का अधिगम सर्वाधिक प्रभावशाली होगा जब

(1) पढ़ने-लिखने एवं गणितीय कुशलताओं पर ही बल होगा।

(2) बालकों का संज्ञानात्मक, भावात्मक विकास होगा।

तथा मनोचालक पक्ष क

(3) शिक्षण व्यवस्था एकाधिकारवादी होगी। 

(4) शिक्षक अधिगम प्रक्रिया में आगे होकर बालकों को निष्क्रिय रखेगा।

व्याख्या (2) बालकों का अधिगम सर्वाधिक प्रभावशाली होगा जब बालको का संज्ञानात्मक, भावात्मक तथा मनोचालक पक्षों (Cognitive, Affective and Psychomotor domain) का विकास होगा।

  25. स्मृति स्तर एवं बोध स्तर के शिक्षण प्रतिमान की संरचना में कौन-सा सोपान उभयनिष्ठ है?

(1) सामान्यीकरण 

(2) अन्वेषण

(3) प्रस्तुतीकरण

(4) तैयारी

व्याख्या (3) स्मृति स्तर एवं बोध स्तर के शिक्षण प्रतिमान की संरचना में प्रस्तुतीकरण (Presentation) सोपान उभयनिष्ठ है। शिक्षण के प्रथम स्तर स्मृति, स्तर (Memory Level) में शिक्षण-अधिगम के उद्देश्यों का निम्न कौशल; जैसे ज्ञान एवं तथ्य सम्बन्धी सूचनाएँ प्रदान करना, बालकों की स्मरण शक्ति का विकास करना, तथ्यों को पुनः स्मरण करना, पहचानना व उन्हें पुनः प्रस्तुत करना आदि प्राप्त किया जाता है। दूसरे स्तर बोध स्तर (Understanding Level) में अधिगम कार्यों का लक्ष्य एवं सम्बन्ध मौखिक – लिखित ग्राफीय सूचनाओं को समझना, उनकी व्याख्या, वर्गीकरण, संक्षिप्तीकरण एवं प्राप्त ज्ञान को तुलनात्मक रूप से प्रस्तुत करने में सक्षमता को प्राप्त करना है। इन स्तरों में अतिरिक्त शिक्षण प्रतिमान के तीसरे स्तर चिन्तन स्तर(Reflective Level) का उद्देश्य सूझ की उत्पत्ति, स्व-चित्तन को बढ़ावा देना तथा आलोचनात्मक चिन्तन का विकास करना है।

26. निम्न में किस सिद्धान्त को पुनर्बलन का सिद्धान्त भी कहते हैं? 

(1) शास्त्रीय अनुबन्धन सिद्धान्त

(2) उदीपक अनुक्रिया सिद्धान्त

(3) सूझ का सिद्धान्त

(4) क्रिया प्रसूत अनुबन्धन सिद्धान्त

व्याख्या (4) स्किनर द्वारा प्रतिपादित क्रिया प्रसूत अनुबन्धन सिद्धान्त को पुनर्बलन का सिद्धान्त (Theory of Reinforcement ) भी कहते हैं।  के अन्य विकल्पों से शास्त्रीय अनुबन्धन सिद्धान्त (Classical Conditioning Theory) पावलोय द्वारा उदीपक अनुक्रिया सिद्धान्त (Stimulus Response Theory) थार्नडाइक द्वारा तथा सूझ का सिद्धान्त (Theory of Insight) कोहलर द्वारा प्रतिपादित है।

27. निम्न में से कौन-सी अवस्था खूनर के संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त का अंग नहीं है?

(1) आन्त प्रज्ञ अवस्था

(2) प्रतिबिम्बात्मक अवस्था

(3) संकेतात्मक अवस्था 

 (4) क्रियात्मक अवस्था

व्याख्या (1) आन्त प्रज्ञ अवस्था (Intuitive stage) ब्रूनर के संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त का अंग नहीं है। ब्रूनर के सिद्धान्त की तीन अवस्थाएँ हैं-1. क्रियात्मक अवस्था (Enactive Stage) 2. प्रतिबिम्बात्मक अवस्था (Iconic Stage) 3. संकेतात्मक अवस्था (Symbolic Stage)  क्रियात्मक अवस्था में बच्चा अपनी अनुभूतियों को क्रियाओं के द्वारा व्यक्त करता है। प्रतिबिम्बात्मक अवस्था में बालक दृश्य प्रतिमाओं (Visual images) माध्यम से अपनी अनुभूतियों की अभिव्यक्ति करता है। संकेतात्मक अवस्था में बालक अपनी अनुभूतियों की अभिव्यक्ति भाषा के > आन्त प्रज्ञ अवस्था पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त की दूसरी माध्यम से करता है।अवस्था पूर्व संक्रियात्मक अवस्था की विशेषता है। इस अवस्था की अवधि 4 से 7 वर्ष की है। इस अवस्था के बालकों का चिन्तन एवं तर्कण पहले से कहीं अधिक परिपक्व हो जाता है। अतः अब ये गणितीय संक्रियाएँ। जैसे-जमा घटा, गुणा, भाग करने में सक्षम हो जाते हैं। किन्तु पलटावी गुण की अनुपस्थिति के कारण गणितीय संक्रियाओं के पीछे लगे तर्कों को बालक नहीं समझ पाते हैं।

28. मॉरीशन ने घोष स्तर के शिक्षण प्रतिमान में पाँच पदों का वर्णन किया है ये हैं

 1. प्रस्तुतीकरण

11. खोज

III. संगठन / व्यवस्था

 IV. आत्मीकरण

 V. वाचन/ अभिव्यक्तिकरण

इनकी सही क्रम है।

(1) IV, V, III, I, II 

(2) II, I, IV, III, V

(3) II, I, III, IV, v

(4)I, II, III, IV, V

व्याख्या (2) मॉरीशन ने बोध स्तर के शिक्षण प्रतिमान में पाँच पदों का वर्णन किया है, वे इस प्रकार हैं-(i) प्रस्तुतीकरण (Presentation) (ii) खोज (Exploration) (iii) संगठन / व्यवस्था ( Organisation (iv) आत्मीकरण (Assimilation)

(v) वाचन / अभिव्यक्तिकरण (Recitation) बोध स्तर के शिक्षण में शिक्षक छात्रों के समक्ष पाठ्य-वस्तु को इस प्रकार प्रस्तुत करता है कि छात्रों को बोध के लिए अधिक-से-अधिक अवसर मिले और छात्रों में अधिक सूझ-बूझ उत्पन्न हो सके।

29. निम्न में से कौन-सा संज्ञानात्मक क्षेत्र से सम्बन्धित नहीं है?

(1) अनुमूल्यन 

 (3) बोध

(2) अनुप्रयोग 

 (4) ज्ञान

व्याख्या (1) अनुमूल्यन (Valuing) संज्ञानात्मक क्षेत्र (Cognitive domain) से सम्बन्धित नहीं है।

 अनुप्रयोग (Application). बोध (Understanding) तथा ज्ञान (Knowledge) संज्ञानात्मक क्षेत्र से सम्बन्धित हैं। उपरोक्त के अतिरिक्त (Analysis), संश्लेषण (Synthesis) तथा मूल्याकंन (Evaluation) भी संज्ञानात्मक क्षेत्र से सम्बन्धित हैं। 

30. निम्न में से कौन-सा अधिगम का वक्र नहीं है?

(1) नतोदर 

(2) मिश्रित

 (3) लम्बवत्

(4) उन्नतोदर (उत्तल)

व्याख्या (3) (Longitudinal) अधिगम का वक्र नहीं है।अधिगम के चार चक्र हैं जो इस प्रकार हैं- (i) सरल रेखीय वक्र (Straight Line Curve) जब समय के साथ-साथ अधिगम की मात्रा में समान रूप से ही वृद्धि होती है तो यह चक्र निर्मित होता है। इसकी आकृति इस प्रकार की होती है-

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